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Sunday, February 21, 2021

Maa hindi kahani- माँ हिन्दी कहानी

  Hindi Kahani


Maa hindi kahani- माँ हिन्दी कहानी
Maa hindi kahani- माँ हिन्दी कहानी


पत्नी बार-बार माँ पर इल्जाम लगाए जा रही थी और पति बार-बार उसको अपनी हद मेें रहने के लिए बोल रहा था, लेकिन पत्नी चुप होने का नाम ही ले रह थी। वह जोर-जोर से चीख-चीखकर कह रही थी  कि, ‘‘ उसने अंगूठी टेबल पर ही रखी थी और तुम्हारे और मेरे अलावा इस कमरें में कोई नहीं आया अंगूठी हो न हो माँ जी ने ही उठाई है।


बात जब पति की बर्दाशत के बाहर हो गयी तो उसने पत्नी की गाल पर एक जोदार तमाचा दे मारा अभी तीन महीने पहले ही तो शादी हुई थी। पत्नी से तमाचा सहन नहीं हुआ। वह घर छोड़कर जाने लगी और जाते-जाते पति से एक सवाल पूछा कि तुमको अपनी माँ पर इतना विश्वास क्यों........?


पति ने जो जवाब दिया उस जवाब को सुनकर दरवाजे के पीछे खड़ी माँ ने सुना तो उसका मन भर आया पति ने पत्नी को बताया कि, ‘‘ जब वह छोटा था तब उसके पिताजी गुजर गए माँ मोहल्ले के घरों मेें झाडू पोछा लगाकर जो कमा पाती थी उससे एक वक्त का खाना आता था। माँ एक थाली में मुझे परोस देती थी और खाली डिब्बे को ढक्कर रख देती थी और कहती थी कि रोटी, रोटियाँ इस डिब्बे में है बेटा तू खा ले मैं भी हमेशा आधी रोटी खाकर कह देता था कि, ‘‘माँ मेरा पेट भर गया है मुझे और नहीं खाना है।’’


माँ ने मेरी जूठी आधी रोटी खाकर मुझे पाला-पोसा और बड़ा किया है आज मैं दो रोटी कमाने लायक हो गया हूँ लेकिन यह कैसे भूल सकता हूँ कि माँ ने उम्र के इस पड़ाव पर अपनी इच्छाओं को मारा है, वह माँ आज उम्र के इस पड़ाव पर किसी अंगूठी की भूखी होगी........यह मैं सोच भी नहीं सकता।

तुम तो तीन महीने से मेरे साथ हो मैंने तो माँ की तपस्या को पिछले तीस वर्षों से देखा है।

यह सुनकर माँ की आँखों से आँसू छलक उठे वह समझ नहीं पा रही थी कि बेटा उसकी आधी रोटी का कर्ज चुका रहा है या वह बेटे की आधी रोटी का कर्ज पंसद आये।

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