Best Panchatantra stories : Sapoot Kee Pahachaan | पंचतंत्र की कहानी: सपूत की पहचान

Best Panchatantra stories : Sapoot Kee Pahachaan |  पंचतंत्र की कहानी: सपूत की पहचान
Best Panchatantra stories : Sapoot Kee Pahachaan |  पंचतंत्र की कहानी: सपूत की पहचान


Panchatantra Stories- एक गाँव के परघट पर एक बार तीन स्त्रियां पानी भरने आई। वहीं एक बुड्ढा यात्री बैठा हुआ सत्तू खा रहा था। तीनों औरतें जमीन पर घड़े रखकर बैठ गई और बुड्ढे को सुना-सुनाकर आपस में इस प्रकार बातें करने लगीं।

एक स्त्री ने दूसरी से कहा-बहन, पंडित पोथाराम का शिष्य मेरा लड़का तोताराम जब से शास्त्री होकर आया है, तब से उसने धूम मचा दी है। सारे गांव में उसी की वाह-वाह हो रही है। वह ऐसा शकुन बताता है कि चटपट लाभ होने लगता है और सुनो, वह आकाश के तारों को गिन-गिनकर उनके नाम बता देता है। परलोक की सभी बातें उसे मालूम हैं। 

यमराज की कचहरी में कैसे फैसला होता है, इसका भी उसे पता है। भैरव जी के गणों के नाम, यमदूतों के नाम और सभी नरकों के नाम-धाम उसे याद हैं। पता नहीं, वह कैसे भगवान की सब लीलाएं जान लेता है? ब्याह-शादियों में वह शास्त्रार्थ करते-करते विरोधी पंडितों के मुँह नोच लेता है। मैं ऐसे पंडित को जन्म देकर अपने को धन्य मानती हूँ। बाहर से कोई आता है तो मेरी और उंगली उठाकर दूसरों से कहता है। देखों, वहीं शास्त्री जी की माँ हैं। पानी भरने जा रही हैं।

उसकी बातें सुनकर दूसरी स्त्री बोली-अरी सखी, मेरे लाल का हाल सुनो। वैसा पहलवान दस-पांच गांवों में देखने को नहीं मिलता। वह पांच सौ बैठक सवेरे और उतनी ही शाम को करता है। आखाड़ों मंे वह ताल ठोक कर बड़े-बड़े नटों से भिड़ जाता है। बहिन जी, सच मानना, पहलवानी में उसने जितना नाम कमाया उतना क्या कोई कमाएगा। मैं उसे हलवा मालपूआ बनाकर दिन भर खिलाती हूँ।

खा-पीकर वह हाथी की तरह झूमता हुआ जब सैर-सपाटे को निकलता है तो मैं फूली नहीं समाती। अभी मैं पानी भरने आ रही थी कि रास्तें में एक किसान ने मेरी और इशारा करके कहा-बेटा देख, यह उस पहलवान की माँ है, जिसने कल कल्लू नट को चारों खाने चित कर दिया था। सब मान सहेली, मैं बेटे की बड़ाई सुनकर उछलने लगी।

दोनों की बातें सुनकर तीसरी स्त्री चुप रही। इस पर एक ने कहा-तू चुप क्यों है? मालूम होता है तेरा लड़का लायक नहीं निकला।

तीसरी स्त्री बोली-बहिनों, जैसा भी है, मेरे लिए बहुत अच्छा है। उसे नाम कमाने की लालसा नहीं हैं। वह सीधे स्वभाव का आदमी है, दिन भर खेतों में काम करता है, शाम को आकर घर के लिए पानी भर देता है। घर के काम से उसे इतनी छुट्टी ही नहीं मिलती कि वह बाहर नाम कमाए। 

आज मेरे बहुत कहने पर वह मेला देखने गया है, तभी मुझे पानी भरने आना पड़ा है। मुझे आज इधर आते देखकर देखने वाले इसी बात पर आश्चर्य करते थे कि मुझे पानी भरने के लिए कैसे निकलना पड़ा।

तीनों की बातें समाप्त हुई तो वे जल्दी-जल्दी अपने-अपने घड़ों में पानी भर कर वहां से रवाना हुई। बुड्ढा यात्री भी उनके पीछे-पीछे चल पड़ा। 

थोड़ी दूर से तीन नवयुवक आते दिखाई पड़े। वे तीनों उन स्त्रियों के लड़के थे, मेले से घर लौट रहे थे। एक ने पहली स्त्री के पास जाकर कहा-माँ, मैं अच्छी साइड से घर की ओर जा रहा हूँ, रास्ते में भरा घड़ा मिलना शुभ है।

यह कहकर वह जल्दी-जल्दी अपने घर की ओर चला। दूसरे ने दूसरी स्त्री से कहां-माँ, मैं मेले के दंगल में बाजी मारकर आ रहा हूँ। जल्दी पानी लेकर घर आना, मुझे भूख लगी है।

यह कहता हुआ वह भी आगे बढ़ गया। इसके बाद तीसरा युवक तीसरी के पास आया और उसके हाथ से पानी का घड़ा लेकर बोला-माँ, तू क्यों पानी भरने चली आई, मैं तो आ ही रहा था।

घड़ा लेकर वह घर की ओर चला। तब अपने-अपने बेटों की ओर इशारा करके स्त्रियों ने साथ चलने वाले बुड्ढे से पूछा-बाबा, हमारे बेटों के बारे में तुम क्या कहते हो?

बुड्ढा अपनी दाढ़ी पर हाथ फेरता हुआ बोला- तुम लोग अपने-अपने बेटों के बारे में चाहे जो कहो, मेरी राय में इन तीनों में केवल एक ऐसा है जिसे बेटा कहा जा सकता है। 

पहले दो तो अपनी-अपनी माँ के पेट से निकल कर उनसे बहुत दूर हो गए हैं। तीसरा शरीर से भिन्न होकर भी माँ के मन से अपने मन को मिलाए हुए है। जिसमें आत्मीयता है, मैं उसी को सबूत मानता हूँ।

दोनों स्त्रियों के मुँह छोटे होकर गर्दनों से इस तरह लटक गए जैसे पेड़ से चमगादड़। तीसरी स्त्री का मुंह पूर्णमासी के चांद की तरह ऊपर उठने लगा।


Best Panchatantra stories 

Sapoot Kee Pahachaan


Panchatantra Stories- Once at a village parghat three women came to fetch water. There an old traveler was sitting and eating sattu. The three women sat down with pots on the ground and after listening to the old man started talking to each other like this.

One woman said to the other - Sister, since my son Totaram, a disciple of Pandit Potharam, has come as a Shastri, he has created a buzz. He is being praised in the whole village. He tells such an ominous that there is a quick profit and listen, he counts the stars of the sky and tells their names.

He knows all the things of the hereafter. He also knows how the decision is taken in Yamraj's court. He remembers the names of the Ganas of Bhairav ​​ji, the names of the eunuchs and the names of all the hells. I don't know, how does he know all the pastimes of God? In marriages and marriages, while arguing, he scratches the faces of the opposing pundits. I consider myself blessed by giving birth to such a Pandit. When someone comes from outside, raises my finger and tells it to others. Look, there is Shastri ji's mother. Going to fill water.

Hearing his words, the other woman said - Dear friend, listen to my Lal's condition. Such a wrestler is not found in ten or five villages. He holds five hundred meetings in the morning and in the same evening. In the akharas, he strikes the beat and clashes with big nuts. Sister, believe the truth, will anyone earn as much name as he earned in wrestling? I make him pudding malpua and feed him throughout the day.

When he is swinging like an elephant after eating and drinking, when he goes out for a walk, I do not get tired. Just now I was coming to fetch water when a farmer pointed towards me on the way and said – Look son, this is the mother of the wrestler, who had made Kallu nut eat all four yesterday. All my friends, I started jumping on hearing the praise of my son.

The third woman remained silent after listening to both of them. On this one said – why are you silent? Looks like your boy didn't deserve it.

The third woman said- Sisters, as it is, it is very good for me. He has no desire to earn a name. He is a man of straight nature, works in the fields all day long, comes in the evening to fill water for the house. He does not get enough leave from household work that he earns a name outside. Today, on my request, he has gone to see the fair, only then I have to come to fetch water. Seeing me coming here today, those who saw me wondered how I had to go out to get water.

When the talks of the three ended, they quickly filled their pots with water and left from there. The old traveler also followed him. Three young men were seen coming from a distance. All three of them were the boys of those women, returning home from the fair. One went to the first woman and said - Mother, I am going from the good side towards the house, it is auspicious to find a full pot on the way.

Saying this he hurriedly walked towards his house. Where did the other woman from the other woman, I am coming after winning the fair in the fair. Coming home early with water, I am hungry.

Saying this he also went ahead. After this the third young man came to the third and took a pot of water from his hand and said - Mother, why did you come to fill water, I was coming.

Taking the pitcher, he walked towards the house. Then, pointing to their sons, the women asked the old man who was accompanying them - Baba, what do you say about our sons?

The old man stroking his beard said - Whatever you may say about your sons, in my opinion there is only one among these three who can be called a son. The first two have come out of their mothers' stomachs and are far away from them. The third one is merging his mind with the mother's mind even after being separated from the body. The one who has affinity, I consider that as proof.

The faces of both the women became small and hung from their necks like a bat from a tree. The third woman's mouth started rising like a full moon.

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